पटना, 07 सितम्बर (अविनाश कुमार) बिहार में बाढ़ ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के कई जिलों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से गांवों और शहरों के निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। पटना, छपरा, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया और कटिहार समेत कई जिलों में बाढ़ का असर गहराता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 22.42 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। गंगा के साथ कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदियों के उफान ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बाढ़ का असर राज्य के 12 जिलों में व्यापक रूप से देखा जा रहा है। करीब 70 प्रखंडों की 368 पंचायतों में 22 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई गांवों में घरों के आसपास पानी भर गया है, जबकि कुछ स्थानों पर लोगों को सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करना पड़ा है।

जलभराव के कारण आवागमन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पटना के गांधीघाट, हाथीदह और पंडारक में गंगा का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। हाथीदह में गंगा 41.76 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सुबह यहां जलस्तर 43.52 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग ने इन इलाकों में अत्यधिक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। पटना के गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के पुराने रिकॉर्ड से भी अधिक है।

जलस्तर बढ़ने के बाद पटना सिटी के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पुनपुन नदी के आसपास बसे गांव भी पानी से घिरने लगे हैं।उधर, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदियों में भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। लगातार बढ़ते पानी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखने के साथ लोगों को सुरक्षित रहने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।













