पटना, 20 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार में हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर हुए प्रशासनिक तबादलों पर अब केंद्र सरकार ने गंभीर आपत्ति जताई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को पत्र भेजा है। मंत्रालय ने कहा है कि वर्ष 2027 की जनगणना से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे अधिकारियों के स्थानांतरण से तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से जिलाधिकारी (डीएम), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) के तबादलों पर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय के अनुसार, जनगणना प्रक्रिया में यही अधिकारी नोडल भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर इनका स्थानांतरण जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है।

जनगणना कार्य की निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी रंजिता द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि 11 मार्च 2026 को ही जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने संबंधी निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद 7 अप्रैल 2026 को बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भी सभी विभागों को पत्र भेजकर 31 मार्च 2027 तक ऐसे अधिकारियों का तबादला नहीं करने की सलाह दी थी। पत्र में यह भी कहा गया है कि शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रगणक एवं पर्यवेक्षक के रूप में नामित कर उनका प्रशिक्षण भी पूरा कराया जा चुका है।

इसके बावजूद जनगणना कार्य से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मियों के तबादले कर दिए गए, जिससे दूसरे चरण की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल में मई 2026 से अब तक विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में आईएएस, बिहार प्रशासनिक सेवा और अन्य अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। हाल ही में 16 जुलाई को भी नौ आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण की अधिसूचना जारी की गई थी। बिहार में जनगणना का पहला चरण 17 अप्रैल 2026 से पूरा हो चुका है, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। इसी चरण में परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्र की जाएगी। ऐसे में केंद्र सरकार ने जनगणना व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने और प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।














