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बिहार में ग्रीन एनर्जी की बड़ी छलांग: 2,178 करोड़ की मांग, 3305 मेगावाट सोलर परियोजनाओं से बदलेगी बिजली की तस्वीर

पटना, 14 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार में स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के समक्ष 2,178 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव भेजा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन, बैटरी स्टोरेज और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।ऊर्जा विभाग के अनुसार बिहार के जमुई, बांका, लखीसराय, औरंगाबाद तथा कैमूर जिलों में कुल 3305 मेगावाट क्षमता के सोलर एनर्जी संयंत्र और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) स्थापित किए जा रहे हैं।

इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण आवश्यक है। इसी उद्देश्य से करीब 2,178 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है और मंत्रालय को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है। ऊर्जा विभाग ने केंद्र सरकार को यह भी बताया है कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत वर्ष 2024-25 में बिहार में किए गए कार्यों की राशि अब तक राज्य सरकार को प्राप्त नहीं हुई है। विभाग ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है और भुगतान जारी करने के लिए मंत्रालय को रिमाइंडर भी भेजे गए हैं। इसके साथ ही विभाग ने औरंगाबाद जिले में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) द्वारा स्थापित किए जाने वाले 150 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क को भी प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

इस परियोजना के लिए करीब 500 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र पहले ही जारी किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग चाहता है कि इस परियोजना पर शीघ्र काम शुरू हो, क्योंकि इसे भी ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। वहीं, राज्य के 58 लाख कुटीर ज्योति बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी सौर ऊर्जा विस्तार की योजना तैयार की गई है। फिलहाल केवल 2.5 लाख उपभोक्ताओं के लिए 1.1 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सोलर पैनल की स्वीकृति मिली है। अब पहले चरण में 10 लाख उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। योजना को मंजूरी मिलने पर बिहार में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई रफ्तार मिलने के साथ बिजली उपभोक्ताओं के खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

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