पटना, 08 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार में आधुनिक और तेज परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को पटना से चार प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराने की मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद बिहार में रैपिड रेल चलाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।सरकार की योजना के अनुसार रैपिड रेल पटना से मुजफ्फरपुर (हाजीपुर और सोनपुर होते हुए), बेगूसराय, आरा और गयाजी तक संचालित की जाएगी। इन चार कॉरिडोर के विकसित होने से राजधानी और आसपास के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होने की उम्मीद है। साथ ही क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

परियोजना के लिए अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को सौंपी गई है। यही संस्था दिल्ली-एनसीआर में रैपिड रेल परियोजनाओं का सफल संचालन और विकास कर रही है। अब बिहार में भी इसी मॉडल पर आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि रैपिड रेल परियोजना राज्य के सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगी। इससे शहरों के बीच आवागमन आसान होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और शहरी विकास को नई रफ्तार मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बिहार को आधुनिक आधारभूत संरचना से लैस करने के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है।

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पटना एम्स के विस्तार को मंजूरी देते हुए दानापुर के भूसौला में 26.76 एकड़ भूमि अधिग्रहण का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना पर लगभग 348.90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी। रैपिड रेल और एम्स विस्तार की इन दो बड़ी परियोजनाओं को बिहार के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।














