पटना, 06 जुलाई (अविनाश कुमार) भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। परिजनों ने सरकार को 8 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि मामले में आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भरत तिवारी की मां आशा देवी और बहन पुष्पा कुमारी ने कहा कि न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। परिजनों ने आरोप लगाया कि 17 जून को भरत भूषण तिवारी की फर्जी पुलिस मुठभेड़ में हत्या की गई। उन्होंने इस मामले में शामिल बताए जा रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच अभी जारी है। प्रेस वार्ता के दौरान पुष्पा कुमारी और आशा देवी ने दावा किया कि उनका परिवार लगातार भय के साये में जी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देर रात बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनके घर के आसपास घूमती हैं, जिससे परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। परिजनों ने जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन डीएसपी राजेश कुमार शर्मा, जगदीशपुर थाने के एसएचओ राजेश मालाकार, पुलिसकर्मी अंकित आर्यन, एसआई सच्चिदानंद यादव तथा एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सूत्रों के अनुसार, यदि आमरण अनशन शुरू होता है तो इसमें उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। इससे आंदोलन का दायरा और व्यापक हो सकता है। परिजनों की घोषणा के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। इससे पहले भरत तिवारी की मां ने गृह विभाग द्वारा पूर्व डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी दिए जाने पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें नई जिम्मेदारी देना न्याय की भावना के विपरीत है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है, जबकि परिजनों ने साफ कर दिया है कि गिरफ्तारी तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
















