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बिहार का सबसे बड़ा टेंडर घोटाला: IAS से लेकर इंजीनियर और ठेकेदार तक फंसे, 7 आरोपियों पर विजिलेंस की पहली चार्जशीट

पटना, 25 जून (अविनाश कुमार) बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बड़ा कदम उठाते हुए पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस, पूर्व वित्त सचिव मुमुक्षु कुमार चौधरी समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी टेंडरों की बंदरबांट, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। जांच के अनुसार, ठेकेदार रिशु श्री इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड है। आरोप है कि उसने अपनी कंपनियों के माध्यम से जल संसाधन, भवन निर्माण, शहरी विकास और अन्य विभागों में प्रभाव बनाकर बड़े सरकारी टेंडर हासिल किए।

इसके बदले संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों को 2 से 7 प्रतिशत तक कमीशन दिए जाने के प्रमाण मिले हैं। चार्जशीट में बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम प्रमुखता से शामिल है। आरोप है कि सचिव पद पर रहते हुए उन्होंने नियमों को दरकिनार कर टेंडर आवंटन में अनियमितताएं कीं। जांच में कथित तौर पर लाखों रुपये की रिश्वत और संदिग्ध बैंक लेन-देन के साक्ष्य सामने आए हैं। फिलहाल वे फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश में छापेमारी जारी है।पूर्व वित्त सचिव मुमुक्षु कुमार चौधरी पर भी पद का दुरुपयोग कर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने तथा बदले में आर्थिक लाभ लेने का आरोप है। जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

मामले में भवन निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर तरणी दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह, मातृस्वा इंफ्रा के निदेशक पवन कुमार तथा मातृस्वा कंस्ट्रक्शन के निदेशक संतोष कुमार के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि इन लोगों ने टेंडर दिलाने, बिल पास कराने और कमीशन के लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।विजिलेंस जांच में व्हाट्सएप चैट, डिजिटल रिकॉर्ड, अकाउंटिंग लेजर, बैंक ट्रांजैक्शन और नकद बरामदगी जैसे कई अहम साक्ष्य सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि भ्रष्टाचार से अर्जित रकम का उपयोग बेनामी संपत्तियां और महंगी जमीनें खरीदने में किया गया।SVU के अनुसार सात आरोपियों में से पांच गिरफ्तार होकर जेल में हैं, जबकि दो आरोपी अब भी फरार हैं। जांच एजेंसियां इस बहुचर्चित घोटाले की परतें खोलने में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

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