पटना, 24 जून (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य में कथित 30 हजार करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले का आरोप लगाते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि पटना हाई कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर 278 पन्नों के जवाबी हलफनामे में बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट के संकेत मिले हैं। प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने आरोप लगाया कि शहरी विकास विभाग और नमामि गंगे परियोजना से जुड़े टेंडरों में भारी अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और कथित व्हाट्सऐप चैट से भ्रष्टाचार के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सुधाकर सिंह ने कहा कि एक कथित चैट में “5 किलो पहुंचाने” की बात कही गई है, जिसे उन्होंने रिश्वत से जुड़ा सांकेतिक संवाद बताया।सांसद ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया से प्राप्त कथित अवैध धन का उपयोग विदेश यात्राओं, महंगे उपहारों और अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग कराने में किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि नमामि गंगे योजना के एक बड़े टेंडर के बदले करोड़ों रुपये की रिश्वत दी गई, जिसकी जांच एजेंसियों के पास जानकारी मौजूद है। सुधाकर सिंह ने हाल ही में निलंबित दो जूनियर IAS अधिकारियों के मामले को भी उठाते हुए कहा कि वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में नौ वरिष्ठ IAS अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने कुछ अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक रूप से लिए। RJD सांसद ने नमामि गंगे योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गंगा सफाई के लिए आए हजारों करोड़ रुपये के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं दिखे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय ठेकेदारों को अवसर देने की नीति को दरकिनार कर बड़े पैकेज बनाकर बाहरी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया।हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।















