पटना, 23 जून (अविनाश कुमार) भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने बिहार की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। एक ओर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देते हुए स्पष्ट कहा कि “जिसे जो करना है करे, बिहार में अपराधियों से कोई समझौता नहीं होगा”, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने बयान में भरत भूषण तिवारी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

उनके इस बयान के बाद विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी मामले पर अपनी अलग राय रखनी शुरू कर दी है। सबसे तीखी प्रतिक्रिया बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी की ओर से आई है। जदयू कोटे से मंत्री अशोक चौधरी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भरत भूषण तिवारी कोई कुख्यात अपराधी था? उन्होंने पूछा कि सरकार ने पुलिस को हथियार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिए हैं या किसी को भी गोली मार देने के लिए। उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी की तस्वीरें भोजपुर के डीएम और एसपी के साथ सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं तथा स्थानीय लोग उसे समाजसेवी के रूप में जानते थे। अशोक चौधरी ने कहा कि यदि किसी समाजसेवी को अपराधी बताकर उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा तो इससे आम जनता का पुलिस पर से विश्वास उठ जाएगा।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जांच में कोई पुलिस अधिकारी या कर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी पहले ही एनकाउंटर पर सवाल उठा चुके हैं। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने इसे “एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या” करार देकर विवाद को और हवा दे दी है।भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस प्रकरण को और अधिक गर्मा सकती हैं।
















