पटना, 13 जून (पटना डेस्क) दिल्ली में हाल ही में आयोजित इंडिया गठबंधन की अहम बैठक में बिहार की राजनीति को लेकर एक विशेष रणनीति तैयार की गई है। इस रणनीति को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सौंपी गई है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस मिशन की राह आसान नहीं है, क्योंकि कांग्रेस के भीतर ही तेजस्वी के नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार कांग्रेस का एक वर्ग तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रमुख चेहरा मानने को तैयार नहीं है। बावजूद इसके, इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बैठक में यह स्पष्ट किया कि बिहार में सरकार के खिलाफ संघर्ष को धार देने के लिए तेजस्वी यादव को कांग्रेस समेत सभी सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिलेगा।

इससे राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। बैठक में यह भी तय किया गया कि बिहार में किन मुद्दों पर आंदोलन, धरना और प्रदर्शन किए जाएंगे, इसका निर्णय राज्य स्तर पर तेजस्वी यादव और महागठबंधन के स्थानीय नेताओं की संयुक्त बैठकों में लिया जाएगा। जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर साझा रणनीति तैयार कर सरकार को घेरने की योजना बनाई गई है। विधानसभा चुनाव के बाद बिखराव की स्थिति में पहुंच चुके महागठबंधन को फिर से मजबूत करने की कवायद भी तेज हो गई है। चुनाव के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा था कि इंडिया गठबंधन केवल चुनावी समझौता था, जबकि तेजस्वी यादव ने इसे लोकसभा चुनाव तक सीमित बताया था।

इन बयानों से दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ गई थी। अब गठबंधन के नेताओं ने पुराने मतभेद भुलाकर एकजुट होने का संकल्प लिया है। निर्णय लिया गया है कि सरकार की नीतियों और जनहित के मुद्दों पर सभी घटक दल संयुक्त रूप से आंदोलन करेंगे। साथ ही हर महीने महागठबंधन की समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के बाद भाकपा-माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि करीब तीन घंटे चली चर्चा में आपसी दूरी कम करने और विपक्षी एकता को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस से भी बड़ा दिल दिखाने और सहयोगी दलों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की अपील की।














