बक्सर, 31 मई (विक्रांत) देश की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 1 जून से 30 जून 2026 तक देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” चलाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में शुरू हो रहा यह अभियान मिट्टी, जल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता पैदा करेगा। अभियान की तैयारियों को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव डॉ. एम.एल. जाट की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई।

बैठक में देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य, जल संरक्षण और संतुलित पोषण प्रबंधन भारतीय कृषि की दीर्घकालिक समृद्धि की कुंजी है। बैठक में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की ओर से कुलपति प्रो. (डॉ.) डी.आर. सिंह के नेतृत्व में सभी अधिष्ठाता, निदेशक, कुलसचिव, वित्त नियंत्रक एवं विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता की। विश्वविद्यालय ने राज्यभर में अपने कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान केंद्रों और विस्तार तंत्र के माध्यम से अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने का निर्णय लिया है।

अभियान के दौरान किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविर, खेत दिवस, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, प्रदर्शन इकाइयों तथा वैज्ञानिक परामर्श कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। वैज्ञानिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक खाद, हरी खाद, फसल अवशेष प्रबंधन और सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व की जानकारी देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी की गिरती उर्वरता और बढ़ती उत्पादन लागत कृषि क्षेत्र की बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में यह अभियान किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन और फसल विविधीकरण जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। अभियान में युवाओं और ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और किसानों से इस राष्ट्रीय अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की अपील की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित जल संसाधन और वैज्ञानिक खेती ही विकसित भारत तथा किसानों की समृद्धि की मजबूत आधारशिला साबित होगी।















