दरभंगा, 31 मई (अजय राय) वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक रैयाम चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। गन्ना उद्योग विभाग की सक्रियता और लगातार हो रहे सर्वेक्षणों ने इलाके के किसानों में नई उम्मीद जगा दी है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हुईं तो 32 वर्षों से बंद पड़ी यह मिल एक बार फिर क्षेत्र की आर्थिक धड़कन बन सकती है। हाल ही में बिहार सरकार के ईख आयुक्त अनिल कुमार झा ने रैयाम चीनी मिल परिसर और आसपास के क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ संवाद कर गन्ना उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।

इससे पहले गन्ना विभाग की चार सदस्यीय टीम ने सहायक निदेशक अभिनव प्रियदर्शी के नेतृत्व में विभिन्न पंचायतों का दौरा कर किसानों के साथ बैठकें कीं और खेती विस्तार की रणनीति पर चर्चा की। विभाग द्वारा रजौड़ा, फुलकाही, मलंगिया, पाली और गंधवार सहित कई गांवों के किसानों को लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में बीज उत्पादन के लिए मुफ्त गन्ना बीज उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में क्षेत्र में करीब 100 एकड़ भूमि पर गन्ने की खेती हो रही है, जबकि अक्टूबर 2026 तक इसे बढ़ाकर लगभग 350 एकड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।मिल के संभावित संचालन को देखते हुए दरभंगा और मधुबनी जिले के कुल 1038 गांवों को गन्ना आपूर्ति क्षेत्र के रूप में आरक्षित किया गया है।

इनमें दरभंगा के 580 और मधुबनी के 438 गांव शामिल हैं। इससे भविष्य में किसानों को गन्ना विपणन की स्थायी व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि वर्ष 1914 में स्थापित रैयाम चीनी मिल 1994 में बंद हो गई थी। मिल बंद होने से सैकड़ों स्थायी, मौसमी और दैनिक मजदूर बेरोजगार हो गए थे। फरवरी में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ, नई दिल्ली की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। जिला ईख पदाधिकारी पुष्कर राज के अनुसार गन्ना क्षेत्र विस्तार योजना के तहत किसानों को मुफ्त बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं और खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। मिल के पुनरुद्धार की संभावना से पूरे इलाके में उत्साह का माहौल है।













