पटना, 31 मई (अविनाश कुमार) बिहार में सरकारी टेंडर घोटाले और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार ठेकेदार रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार रिशु श्री की पहुंच नौकरशाही के शीर्ष स्तर तक थी और वह विभागों में अधिकारियों की पोस्टिंग से लेकर करोड़ों रुपये के ठेके दिलाने तक में प्रभाव रखता था।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की जांच में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जांच के आधार पर आईएएस संजीव हंस, मुख्य अभियंता तारिणी दास, संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी तथा बीएमएसआईसीएल के डीजीएम पंकज कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अन्य कई अधिकारियों और इंजीनियरों के नाम भी सामने आए हैं, जिससे जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी ठेके हासिल करता था और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का खेल संचालित किया जाता था। आरोप है कि कई विभागों में कमीशन के बदले टेंडर और बिल पास कराए जाते थे। एसवीयू और ईडी अब रिशु श्री के रिश्तेदारों, कर्मचारियों और सहयोगियों की भूमिका भी खंगाल रही हैं। जांच में उसकी पत्नी रितंभरा, भाई चिन्मय प्रिय और शुभम श्री समेत कई परिजनों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि कंपनियों के माध्यम से संदिग्ध धनराशि का लेन-देन किया गया।

सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, बुडको, बीएमएसआईसीएल तथा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम सहित कई विभाग जांच के घेरे में हैं। रिशु श्री के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल की जा रही है। मीठापुर स्थित आवास पर छापेमारी में करोड़ों रुपये के हीरे-सोने के आभूषण और नकदी बरामद होने के बाद गिरफ्तार रिशु श्री फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। एजेंसियां उसे रिमांड पर लेकर और बड़े खुलासे करने की तैयारी में हैं, जिससे नौकरशाही में बेचैनी बढ़ गई है।













