नालंदा, 28 मई (अविनाश पांडेय) जिले में गुरुवार को त्याग, समर्पण और कुर्बानी का पर्व ईद-उल-अजहा पूरे उत्साह, श्रद्धा और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। सुबह होते ही जिलेभर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नमाज अदा कर देश-दुनिया में अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया। बिहारशरीफ शहर के बड़ी दरगाह, सोहसराय, महुआटोला, भरावपर, इमादपुर, शेखाना, शेरपुर मोहल्ला और सालूगंज समेत विभिन्न ईदगाहों एवं मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गई।

सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोग नए परिधानों में ईदगाहों की ओर जाते नजर आए। कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। वहीं हिलसा शहर के योगीपुर रोड स्थित ईदगाह में भी नमाजियों की लंबी कतारें देखने को मिली। यहां सुबह 7 बजे इमाम कारी मोहम्मद मोनाजिर हसन ने नमाज अदा कराई। इसके बाद परवलपुर मस्जिद में 7:15 बजे मो. मीनाक्ष मौलाना ने नमाज पढ़ाई, जबकि जामा मस्जिद में सुबह 8 बजे कारी मोहम्मद तालिब अनवर ने नमाज अदा कराई। नमाज के दौरान इमामों ने ईद-उल-अजहा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व त्याग, कुर्बानी और इंसानियत का संदेश देता है।
उन्होंने बताया कि इस्लाम में ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा दो प्रमुख त्योहार हैं। ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाई जाती है। अल्लाह के हुक्म पर उन्होंने अपने पुत्र हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था, लेकिन उनकी आस्था और समर्पण से खुश होकर अल्लाह ने इस्माइल को सुरक्षित बचा लिया। नमाज के बाद लोगों ने सोशल मीडिया, मोबाइल संदेश और मुलाकातों के जरिए अपने परिजनों, रिश्तेदारों और मित्रों को बकरीद की शुभकामनाएं दी। जिलेभर में दिनभर उत्सव और भाईचारे का माहौल बना रहा।

















