नालंदा, 25 मई (अविनाश पांडेय) नालंदा के ऐतिहासिक राजगीर मलमास मेला में इस बार आस्था और संस्कृति के साथ-साथ नारी सशक्तिकरण की भी अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। जीविका समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मेले में संचालित उनके भोजन स्टॉलों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां बेहद कम कीमत पर शुद्ध, स्वादिष्ट और घर जैसा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।17 मई 2026 से शुरू हुए राजगीर मलमास मेला का उद्घाटन बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया गया। जिला प्रशासन नालंदा की ओर से जीविका दीदियों को कुल 25 स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं।

इन स्टॉलों का संचालन नालंदा जिले के विभिन्न प्रखंडों से आई ग्रामीण महिलाएं कर रही हैं।सबसे खास बात यह है कि यहां मात्र 35 रुपये में पांच रोटी, सब्जी तथा दाल-चावल, सब्जी और अचार लोगों को परोसा जा रहा है। महंगाई के इस दौर में इतने कम दाम पर स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिलने से मेले में आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक काफी खुश नजर आ रहे हैं। आगंतुकों का कहना है कि जीविका दीदियों के हाथों का स्वाद उन्हें घर की याद दिला रहा है। इन स्टॉलों के माध्यम से सिर्फ भोजन ही नहीं परोसा जा रहा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिखी जा रही है।

भोजन में इस्तेमाल होने वाला आटा गिरियक की पूजा दीदी के आटा चक्की केंद्र से, मसाले सिलाव की मंजुला दीदी के उत्पादन केंद्र से और पत्तल-दोना किरण देवी द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। राजगीर की इंदु दीदी भी स्टॉल संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। जानकारी के अनुसार अब तक इन स्टॉलों से करीब चार लाख रुपये का कारोबार हो चुका है। मेला समाप्ति तक यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।















