पटना, 03 मई (पटना डेस्क) बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पदभार संभालने के बाद पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। लगातार हो रहे एनकाउंटर इस बात का संकेत दे रहे हैं कि राज्य में अब अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम हो रहा है।15 अप्रैल को शपथ ग्रहण के बाद से अब तक पुलिस चार एनकाउंटर कर चुकी है, जिनमें दो फुल एनकाउंटर और दो हाफ एनकाउंटर शामिल हैं। वहीं पिछले छह महीनों में कुल 18 मुठभेड़ों का रिकॉर्ड सामने आया है।

ताज़ा मामला सिवान जिले से सामने आया है, जहां रविवार तड़के पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। जानकारी के मुताबिक, जामो थाना क्षेत्र के लद्दी गांव में सुबह करीब चार बजे वाहन जांच के दौरान पुलिस ने अपराधी सोनू यादव को घेर लिया। खुद को घिरता देख उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से वह मौके पर ही ढेर हो गया। सोनू यादव भाजपा के पूर्व विधान पार्षद मनोज कुमार सिंह के भांजे की हत्या का मुख्य आरोपी था और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ हत्या, लूट समेत कई संगीन मामले दर्ज थे। घटनास्थल से हथियार भी बरामद किए गए हैं।

इससे पहले इसी मामले में छोटू यादव को पुलिस ने ‘हाफ एनकाउंटर’ में गिरफ्तार किया था, जिसमें उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। हालिया घटनाक्रम पर नजर डालें तो 22 अप्रैल को पटना में ज्वेलरी शॉप लूटकांड के आरोपी को पुलिस ने पैर में गोली मारकर पकड़ा था। इसके बाद 29 अप्रैल को भागलपुर में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या के आरोपी रामधनी सिंह यादव को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। वहीं 30 अप्रैल को सिवान के चर्चित हर्ष हत्याकांड में भी पुलिस ने पहले एक आरोपी को हाफ एनकाउंटर में घायल किया और फिर मुख्य आरोपी को दो दिन के भीतर ढेर कर दिया। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि बिहार पुलिस अपराधियों के खिलाफ अब आक्रामक रणनीति अपना रही है। हालांकि, इन एनकाउंटरों को लेकर कानूनी और नैतिक बहस भी तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्ती के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है, ताकि कानून का राज कायम रह सके।















