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दादा को अंतिम सलाम: बुझ गया शाहाबाद की राजनीति का चमकता सितारा, 26 अप्रैल को उमड़ेगा जनसैलाब

बक्सर, 25 अप्रैल (विक्रांत) पुराने शाहाबाद की सियासत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रख्यात नेता सत्यनारायण प्रसाद उर्फ एस.एन. दादा को श्रद्धांजलि देने के लिए 26 अप्रैल को डुमरांव में सर्वदलीय सभा आयोजित होगी। डुमरांव नगर परिषद के पुराने नगर भवन में होने वाली इस श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न दलों के नेताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। जीवन पर्यंत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) से जुड़े रहे दादा ने अपनी ईमानदारी, निडरता और जुझारू स्वभाव से राजनीति में खास मुकाम हासिल किया।

हालांकि वे एक ही दल के प्रति समर्पित रहे, लेकिन क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर उन्होंने हमेशा दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर हर पार्टी को नैतिक और बौद्धिक समर्थन दिया। बक्सर को जिला बनाने, डुमरांव को अनुमंडल का दर्जा दिलाने, मलई बराज सिंचाई परियोजना, कृषि कॉलेज और व्यवहार न्यायालय की स्थापना जैसे कई अहम मुद्दों पर उन्होंने आंदोलन की अगुवाई की। उनके नेतृत्व में वामपंथी राजनीति को मजबूती मिली और जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को विस्तार मिला। सीपीआई के वरिष्ठ नेता तेजनारायण सिंह, नागेन्द्र ओझा और अली अनवर सहित कई दिग्गजों ने दादा के ज्ञान और अनुभव को अद्वितीय बताया।

अधिवक्ता-साहित्यकार शंभू शरण नवीन और पत्रकार अरुण विक्रांत के अनुसार, दादा को क्षेत्र के भूगोल, इतिहास और राजनीति की गहरी समझ थी। राजनीतिक जीवन में उन्हें डुमरांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका भी मिला, जहां उनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री हरिहर सिंह से हुआ। कड़े मुकाबले में वे महज करीब एक हजार वोटों से चुनाव हार गए, लेकिन उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। 14 जनवरी 1924 को जन्मे दादा ने एमए तक शिक्षा प्राप्त की थी। स्वतंत्रता सेनानी बड़े पिता दुर्गा प्रसाद सिंह के सानिध्य में पले-बढ़े दादा के भीतर बचपन से ही सामाजिक सेवा का जज्बा था। उम्र के अंतिम पड़ाव में भी वे अखबार पढ़कर देश-दुनिया की खबरों पर नजर रखते और बेबाक राय रखते थे। उनकी स्मृति में होने वाली श्रद्धांजलि सभा में राजनीतिक, सामाजिक और आम लोगों की बड़ी भागीदारी उनकी लोकप्रियता की गवाही देगी।

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