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कागजों में फंसा किसान: फार्मर रजिस्ट्री के नए नियम बने आफत, 45% किसान अब भी योजना से बाहर

मधुबनी, 22 अप्रैल (आशीष यादव) जिले में कृषि विभाग की नई व्यवस्था ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य किए जाने के बाद बड़ी संख्या में किसान अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं। स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के 3 लाख 21 हजार 514 पंजीकृत किसानों में से सिर्फ 1 लाख 74 हजार 742 किसानों का ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाया है, यानी करीब 45 प्रतिशत किसान अब भी इससे वंचित हैं।

प्रशासन की ओर से फरवरी तक मिशन मोड में पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाकर फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश की गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ी अड़चन जमीन के कागजात और जमाबंदी से जुड़ी है। दरअसल, पहले कई किसानों ने अपने पूर्वजों या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज जमीन के आधार पर आवेदन किया था, लेकिन अब नियम सख्त हो गए हैं। फार्मर रजिस्ट्री केवल उन्हीं किसानों की हो रही है, जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है।

ऐसे में संयुक्त या पारिवारिक जमाबंदी वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।कई मामलों में आधार कार्ड और जमीन के कागजात में नाम की गड़बड़ी भी बड़ी बाधा बन रही है। किसान बताते हैं कि रजिस्ट्री कराने के लिए उन्हें बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा। संयुक्त जमाबंदी को अलग कराने की प्रक्रिया जटिल होने से परेशानी और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि एलपीसी, केसीसी और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ भी अब फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ गया है। ऐसे में रजिस्ट्री नहीं होने पर किसानों को सरकारी सहायता से वंचित होने का डर सता रहा है।

जिला कृषि पदाधिकारी ललन कुमार चौधरी ने बताया कि अब तक 1.74 लाख किसानों को यूनिक आईडी जारी की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन किसानों का ई-केवाईसी और रजिस्ट्री पूरा नहीं होगा, वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे।

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