पटना, 21 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शपथ लेते ही एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं, लेकिन उनके ताबड़तोड़ फैसलों ने सरकार के भीतर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में सीएम ने पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के एक और फैसले को पलटते हुए बड़ा प्रशासनिक यू-टर्न लिया है। सरकार ने हड़ताल के दौरान निलंबित किए गए 224 राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन रद्द करने का आदेश जारी किया है।

ये कर्मचारी 11 फरवरी 2026 से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। उस समय राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रहे विजय सिन्हा ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कदम उठाते हुए सभी को निलंबित कर दिया था। अब सम्राट सरकार ने इसे वापस लेते हुए कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है।यही नहीं, सरकार ने एक और विवादित आदेश को भी रद्द कर दिया है। पहले जारी निर्देश में कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने सेवाकाल में सिर्फ एक बार ही विभागीय या प्रतियोगी परीक्षा दे सकता है।

इस फैसले से कर्मचारियों में भारी नाराजगी थी। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इसे करियर पर रोक लगाने वाला कदम बताते हुए विरोध दर्ज कराया था।नगर विकास विभाग के 6 अप्रैल के आदेश में यह भी चेतावनी दी गई थी कि नियम का उल्लंघन करने पर नौकरी तक गंवानी पड़ सकती है। अब बिहार सरकार ने इस सख्त प्रावधान को भी वापस ले लिया है। नए फैसले के बाद सरकारी कर्मचारी अब अपनी सेवा के दौरान कई बार परीक्षाओं में शामिल होकर बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे।

सरकार के इस कदम से कर्मचारियों में खुशी की लहर है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे नीति अस्थिरता बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे जनहित में लिया गया फैसला करार दे रहा है। लगातार फैसले पलटने से यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या बिहार में शासन की दिशा बदल रही है या अंदरूनी मतभेद सामने आ रहे हैं।














