बक्सर, 20 अप्रैल (विक्रांत) बदलते जलवायु परिदृश्य और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने तथा खेती को अधिक टिकाऊ बनाने को लेकर सोमवार को राजधानी पटना में अहम बैठक आयोजित की गई। कृषि जलवायु क्षेत्र जोन–III बी की 31वीं क्षेत्रीय शोध एवं प्रसार सलाहकार समिति (खरीफ–2026) की बैठक कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना में हुई, जिसमें वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने मिलकर आगामी खरीफ मौसम के लिए रणनीति तैयार की।

बैठक के मुख्य अतिथि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण खेती की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत बीज, बेहतर फसल प्रबंधन तकनीकें और आधुनिक कृषि पद्धतियां किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि कर सकती हैं।

उन्होंने क्षेत्र के भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों जर्दालु आम, मगही पान, शाही लीची, कतरनी धान और सबौर मखाना के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन विशिष्ट उत्पादों की वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता सुधार और बेहतर विपणन व्यवस्था से किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है तथा इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।

बैठक में कई कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उन्नत बीजों के उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नई तकनीकों की जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे आधुनिक तरीकों से खेती कर अधिक लाभ कमा सकें।

कार्यक्रम के अंत में खरीफ 2026 के लिए अनुसंधान और कृषि प्रसार गतिविधियों की रूपरेखा तय की गई। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक खेती पद्धतियों के माध्यम से क्षेत्र की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाया जाएगा।















