पटना, 17 अप्रैल (पटना डेस्क) जमीन मापी को लेकर आम लोगों की वर्षों पुरानी परेशानी अब खत्म होने जा रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए मापी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। विभाग ने सुपौल सहित सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब न तो ऑफलाइन आवेदन स्वीकार होगा और न ही मापी की रिपोर्ट कागज पर दी जाएगी। नए आदेश के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही पूरी करनी होगी। अगर किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित अंचल के अमीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इससे अब रैयतों को अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मापी के दौरान अमीन को मौके पर ही जियो-टैग तस्वीर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना जियो टैग फोटो के मापी को अधूरा माना जाएगा।विभाग ने समय-सीमा भी तय कर दी है। आवेदन के सात दिन के भीतर जमीन की मापी पूरी करनी होगी, जबकि 14 दिनों के अंदर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी अपर समाहर्ता स्तर से की जाएगी, ताकि कहीं भी लापरवाही न हो।

उमा कुमारी ने बताया कि अब रैयतों को मापी के लिए भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ेगी। ऑनलाइन आवेदन के तीन दिन के भीतर अमीन की तैनाती कर दी जाएगी और सातवें दिन मापी पूरी कर ली जाएगी। यह व्यवस्था सात निश्चय योजना के तहत लागू की गई है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को सरल और पारदर्शी सेवाएं देना है।अंचल कार्यालय की ओर से चौहद्दीदार को स्वतः नोटिस भेजा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

सरकार के इस फैसले को जमीन संबंधी विवादों और देरी को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता को सीधा फायदा मिलेगा।













