नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अशोक “अश्क”) प्रस्तावित परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या 815 तक बढ़ाने के मुद्दे पर संसद में गुरुवार को जबरदस्त सियासी घमासान देखने को मिला। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस प्रस्तावित विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की। लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान तिवारी ने कहा कि यह वास्तव में महिला आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन का विधेयक है, जिस पर महिला आरक्षण का “लिबास” चढ़ाया गया है।

उन्होंने सवाल उठाया, “क्या सरकार इस सदन को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ऑफ चाइना बनाना चाहती है?” तिवारी ने तर्क दिया कि जब 543 सीटों वाली मौजूदा लोकसभा ही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही, तो 815 सीटों पर हालात और बिगड़ेंगे। उन्होंने बताया कि पहली लोकसभा साल में 135 दिन बैठती थी, जबकि 17वीं लोकसभा सिर्फ 55 दिन ही चली।कांग्रेस सांसद ने ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने इस मूल मुद्दे का समाधान नहीं किया है।

उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा 543 सीटों में से ही एक-तिहाई यानी 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। वहीं जून मालिआ (तृणमूल कांग्रेस) ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “राजनीतिक हथकंडा” बताया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन है, लेकिन परिसीमन के जरिए “भ्रम” फैलाया जा रहा है।रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन. के. प्रेमचंद्रन ने भी विधेयक वापस लेने की मांग की।

दूसरी ओर भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि महिला आरक्षण लक्ष्य है और परिसीमन उसका रास्ता। इस मुद्दे पर सियासी तनातनी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
















