अशोक अश्क का जन्म समस्तीपुर जिले के जितवारपुर चौथ में एक साधारण परिवार में हुआ। अशोक अश्क एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी रचनाकार हैं, जिन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे एक संवेदनशील कवि, सशक्त गीतकार, सजग पत्रकार और कुशल फिल्म लेखक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। उनकी रचनाओं में समाज, संस्कृति और मानवीय भावनाओं का गहरा प्रतिबिंब देखने को मिलता है, जो पाठकों और श्रोताओं को सहज ही प्रभावित करता है।
शायरी और कविता के क्षेत्र में अशोक अश्क की लेखनी विशेष रूप से प्रभावशाली है। वे प्रेम, पीड़ा और जीवन की जटिल सच्चाइयों को सरल, मार्मिक और भावपूर्ण शब्दों में अभिव्यक्त करते हैं। इनकी रचनाएँ पाठकों के हृदय को छूने के साथ-साथ उन्हें सोचने के लिए भी प्रेरित करती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने “गाम घर न्यूज़” के सहयोगी संपादक के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता दी। साथ ही, इन्होंने बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों की समीक्षाएँ लिखकर सिनेमा जगत में भी अपनी गहरी समझ का परिचय दिया।
अशोक अश्क एक सफल पत्रकथा लेखक भी हैं और मंचों पर कविता पाठ के माध्यम से श्रोताओं को प्रेरित करते रहते हैं। फिल्म लेखन में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। ‘लोक आस्था का महापर्व छठ’ जैसी फिल्म में उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जबकि ‘मुक्ति अभिशाप से’ में मानवीय संघर्ष और मुक्ति की प्रेरक कहानी को उकेरा। अशोक अश्क ने 2020 में sincine filmsetival का सह निर्देशक रहते हुए festival का सफल आयोजन किया। लेखनी के क्षेत्र में इन्हें कई छोटे बड़े सम्मानों से सम्मानित किया गया है। आगे चलकर 2023 में दशम मिथिला संस्कृति महोत्सव में अशोक अश्क को मिथिला विभूति सम्मान से सम्मानित किया है।