पटना, 02 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की तैयारियों के बीच राज्य में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, नीतीश कुमार आगामी 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं, जिसके बाद मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे का रास्ता खुल जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करना केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका का संकेत भी है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि बिहार में एक लंबे राजनीतिक युग का अंत होने जा रहा है। 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के बाद 11 और 12 अप्रैल को उनके दिल्ली में रुकने की संभावना जताई जा रही है, जहां वे केंद्र सरकार के मंत्रियों और विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकातें उनके नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत का संकेत हैं।

दिल्ली दौरे के बाद नीतीश कुमार पटना लौटकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही बिहार में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री की घोषणा की जा सकती है। यह तारीख कई मायनों में खास मानी जा रही है। इसी दिन B. R. Ambedkar की जयंती होती है, जिसे देशभर में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा, हिंदू पंचांग के अनुसार इसी दिन खरमास समाप्त हो रहा है, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन के भीतर नए चेहरे को लेकर सहमति लगभग बन चुकी है, हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। माना जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।उधर, बिहार की जनता और राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को लेकर उत्सुकता चरम पर है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह नेतृत्व परिवर्तन बेहद अहम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब बिहार की सियासत में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।














