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6 प्रत्याशी 6086 वोटर: MLC चुनाव को लेकर भोजपुर-बक्सर में सियासी पारा हाई, हर वोट होगा निर्णायक

बक्सर, 03 मई (विक्रांत) भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र (MLC) उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार कुल 6086 मतदाता छह प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। खास बात यह है कि इस चुनाव में आम जनता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। निर्वाचन को लेकर दोनों जिलों भोजपुर और बक्सर में प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। मतदान केंद्रों का निर्धारण लगभग पूरा हो चुका है और निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

अधिकारियों की मानें तो हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। अगर जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भोजपुर इस मामले में बक्सर से आगे है। भोजपुर में कुल 3783 मतदाता हैं, जिनमें 2031 महिला और 1752 पुरुष शामिल हैं। वहीं बक्सर में कुल 2303 मतदाता हैं, जिनमें 1223 महिला और 1080 पुरुष हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि दोनों ही जिलों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, जो चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे सकती है। इस उपचुनाव के लिए कुल 25 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें भोजपुर के 14 और बक्सर के 11 केंद्र शामिल हैं।

चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला निर्वाची पदाधिकारी सह डीएम तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में सभी प्रत्याशियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं के साथ अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्वाचक सूची, मतदान प्रक्रिया, मतपेटिका प्राप्ति केंद्र, वज्रगृह-सह-मतगणना केंद्र समेत सभी जरूरी जानकारियां साझा की गई। साथ ही आदर्श आचार संहिता के सख्ती से पालन के निर्देश दिए गए।क्षेत्रवार आंकड़े भी चुनाव को रोचक बना रहे हैं। सबसे अधिक मतदाता बड़हरा (369), पीरो (364), आरा (363), जगदीशपुर (343) और सिमरी (337) प्रखंड में हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है। वहीं केसठ (54), चककी (64), चौगाई (77), गड़हनी (152) और चरपोखरी (163) जैसे क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या कम जरूर है, लेकिन यहां हर वोट का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का भी इम्तिहान है। ऐसे में सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में डटे हैं। अब सबकी नजर मतदान के दिन और नतीजों पर टिकी है, जहां हर वोट इतिहास लिख सकता है।

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