पटना, 02 मई (पटना डेस्क) बिहार के शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब तक केवल शिक्षकों तक सीमित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को विस्तार देते हुए विभाग ने स्कूलों में कार्यरत लिपिकों और परिचारियों को भी दायरे में ला दिया है। नई व्यवस्था के तहत सभी गैर-शैक्षणिक कर्मियों की उपस्थिति भी अब ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देश के बाद जिला शिक्षा कार्यालय ने प्रक्रिया तेज कर दी है।

स्थापना संभाग के डीपीओ कुमार अनुभव ने सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को सख्त आदेश जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर लिपिकों और परिचारियों का विस्तृत डाटा उपलब्ध कराने को कहा है। इस डेटा में नियुक्ति, पदस्थापन और सेवा से जुड़ी सभी जानकारियां शामिल होंगी।विभाग के इस फैसले के बाद अब वेतन भुगतान और सेवा अभिलेख पूरी तरह ऑनलाइन उपस्थिति से जुड़ जाएंगे। यानी जिस दिन उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, उस दिन का वेतन प्रभावित हो सकता है। इससे स्कूलों में वर्षों से चली आ रही ढिलाई पर अंकुश लगाने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समय पर डाटा उपलब्ध नहीं कराने या ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने पर संबंधित प्रधानाध्यापक और कर्मियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस सख्त निर्णय के बाद स्कूलों में कार्यरत क्लर्क और परिचारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। कई कर्मी इसे अनुशासनात्मक सुधार मान रहे हैं, तो कुछ इसे अतिरिक्त दबाव के रूप में देख रहे हैं। कुल मिलाकर, यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।














