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रोजगार का महासंकल्प: बिहार सरकार का बड़ा दांव, लोकल ठेकेदारों को मिलेगा सीधा फायदा

पटना, 30 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार में बेरोजगारी पर करारा प्रहार करने के लिए सरकार ने अब बड़ा मास्टरस्ट्रोक चला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में एक अहम फैसला लेते हुए राज्य के स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। यह पहल ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत लाई गई है, जिसके जरिए अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार चाहती है कि विकास कार्यों का सीधा लाभ बिहार के लोगों को मिले।

इसी उद्देश्य से बिहार लोक निर्माण संहिता में कंडिका-163 (ए) जोड़ने का निर्णय लिया गया है। नए प्रावधान के तहत 25 लाख रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक की लागत वाली सिविल परियोजनाओं में राज्य स्तरीय संवेदकों को अधिमानता दी जाएगी।इस फैसले से स्थानीय ठेकेदारों के लिए अवसरों के नए दरवाजे खुलेंगे। अब तक बड़े प्रोजेक्ट्स में बाहरी कंपनियों का दबदबा रहता था, लेकिन नई नीति से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे ‘लोकल को वोकल’ बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा। मंत्रिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना में संशोधन करते हुए अब हर पुल निर्माण कार्य के लिए अलग-अलग टेंडर जारी करने का निर्णय लिया गया है। पहले कई योजनाओं को मिलाकर एक पैकेज बनाया जाता था, जिससे छोटे ठेकेदारों को मौका नहीं मिल पाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक पुल या सेतु के लिए स्वतंत्र निविदा निकाली जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और छोटे व मध्यम स्तर के ठेकेदार भी प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकेंगे। साथ ही कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार को भरोसा है कि इन फैसलों से न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि ग्रामीण संपर्कता भी मजबूत होगी। बेहतर सड़क और पुल नेटवर्क से गांवों का शहरों से जुड़ाव आसान होगा, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन तय समयसीमा में हुआ, तो राज्य में रोजगार सृजन के साथ-साथ विकास की रफ्तार भी तेज होगी।

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