पटना, 29 जून (पटना डेस्क) पुलिस मुठभेड़ में मारे गए बिलौटी गांव के भरत भूषण तिवारी की स्मृति में भोजपुर में प्रस्तावित स्मारक का निर्माण कार्य शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। कथित एनकाउंटर स्थल पर स्मारक के लिए चबूतरा निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन भूमि को लेकर उठे विवाद के बाद प्रशासन ने निर्माण पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। इसके बाद फिलहाल पूरा निर्माण कार्य ठप हो गया है। जानकारी के अनुसार, शाहपुर के अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि जिस स्थान पर स्मारक का निर्माण कराया जा रहा है, वह बिहार सरकार की भूमि है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है।

यदि बिना अनुमति निर्माण कराया जाता है तो प्रशासन उसे रोकने के साथ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी करेगा। इधर, निर्माण स्थल से सटी निजी भूमि के रैयत ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि स्मारक सड़क के मध्य भाग में बनाया जाए तथा सड़क का विस्तार उनकी निजी जमीन की ओर किया जाए। सरकारी भूमि और निजी रैयत की आपत्तियों के कारण स्मारक निर्माण का मामला फिलहाल उलझ गया है। बताया जा रहा है कि प्रथम चरण में आठ गुणा आठ वर्ग फीट का संगमरमरयुक्त चबूतरा बनाया जाना था। इसके बाद उसी पर भरत भूषण तिवारी की सफेद संगमरमर से निर्मित आदमकद प्रतिमा स्थापित करने तथा पूरे परिसर को आकर्षक स्वरूप देने की योजना थी, ताकि लोग वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार स्मारक निर्माण का पूरा खर्च उत्तराखंड स्थित एक मठ के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज वहन कर रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व वे स्वयं बिलौटी गांव पहुंचे थे और प्रस्तावित स्मारक स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट रखकर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि संबंधी विवाद का समाधान हो जाता है और आवश्यक प्रशासनिक अनुमति मिल जाती है, तो स्मारक निर्माण का कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन के अगले निर्णय और भूमि विवाद के समाधान पर टिकी हुई हैं।













