पटना, 20 जून (पटना डेस्क) बिहार में इस वर्ष दूध उत्पादन ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में प्रतिदिन दूध उत्पादन बढ़कर करीब 26 लाख लीटर पहुंच गया है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 22 लाख लीटर प्रतिदिन था। यानी महज एक वर्ष में करीब 4 लाख लीटर प्रतिदिन की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि ने डेयरी क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस बार मौसम ने पशुपालकों का भरपूर साथ दिया। गर्मी की शुरुआत में हुई लगातार बारिश से हरे पशुचारे की उपलब्धता बढ़ी, जिससे दुधारू पशुओं को बेहतर पोषण मिला और दूध उत्पादन में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आमतौर पर गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन घट जाता है, लेकिन इस बार हालात इसके बिल्कुल उलट रहे।विशेषज्ञों का कहना है कि हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता, संतुलित आहार और अनुकूल मौसम के साथ-साथ पशुओं में किसी बड़ी संक्रामक बीमारी का न फैलना भी उत्पादन बढ़ने का प्रमुख कारण रहा। गाय और भैंसों के स्वस्थ रहने से पशुपालकों को नुकसान नहीं उठाना पड़ा और दूध उत्पादन लगातार बना रहा। हालांकि, पशुधन की संख्या में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। 20वीं पशुधन गणना 2019 के अनुसार बिहार में 1 करोड़ 53 लाख गाय और 77 लाख भैंस थी।

मार्च 2025 में हुई नई पशु गणना के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार गायों की संख्या घटकर करीब 1 करोड़ 48 लाख रह गई है, जबकि भैंसों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है।इसके बावजूद दूध उत्पादन में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी को विभाग बड़ी उपलब्धि मान रहा है। राज्य में सवा दो करोड़ से अधिक पोल्ट्री भी मौजूद हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर पशुपालन प्रबंधन और पोषण व्यवस्था के कारण पशुधन में कमी के बावजूद उत्पादन बढ़ा है। इससे डेयरी उद्योग को मजबूती मिलेगी और लाखों पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है।













