पटना, 06 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब महज एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राज्य की सियासत का सबसे चर्चित मुकाबला बनता नजर आ रहा है। जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने रविवार को बांकीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दीं। उनके इस फैसले के कुछ ही समय बाद सम्राट चौधरी की नीतीश कुमार से हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। हालांकि दोनों घटनाओं को आधिकारिक तौर पर एक-दूसरे से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन समय को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

इधर, पटना में भाजपा नेताओं की अहम बैठक भी हुई, जिसमें सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मंत्री दिलीप जायसवाल, गिरिराज सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक के एजेंडे का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ, लेकिन उपचुनाव की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। ऐसे में प्रशांत किशोर का खुद मैदान में उतरना राजनीतिक रूप से बड़ा दांव माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज इस चुनाव के जरिए शहरी मध्यम वर्ग, युवाओं और पारंपरिक दलों से नाराज मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।

बिहार की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में यह उपचुनाव जन सुराज की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। वर्षों तक विभिन्न दलों के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अब पहली बार खुद जनता के बीच वोट मांगेंगे। ऐसे में यह मुकाबला उनके लिए रणनीतिकार से जननेता बनने की असली कसौटी माना जा रहा है। दूसरी ओर, एनडीए के सामने सिर्फ अपनी पारंपरिक सीट बचाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि यह संदेश देने की भी जिम्मेदारी होगी कि उसका शहरी और पारंपरिक वोट बैंक अब भी मजबूती से उसके साथ खड़ा है। ऐसे में बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाला प्रतिष्ठा का मुकाबला बनता दिखाई दे रहा है।













