नालंदा, 07 जून (अविनाश पांडेय) नालंदा जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां बिहारशरीफ का सदर अस्पताल आधुनिक अग्निशमन संसाधनों से लैस है, वहीं जिले के अधिकांश अस्पतालों में आग से बचाव के मानकों की अनदेखी की जा रही है। इससे मरीजों, परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में 20 मई को अग्निशमन विभाग द्वारा सुरक्षा ऑडिट किया गया था। अस्पताल में ऑटोमैटिक फायर अलार्म सिस्टम, प्रत्येक मंजिल पर पानी की पाइपलाइन, बैकअप मोटर और जेनरेटर की सुविधा उपलब्ध है।

स्वास्थ्य प्रबंधक इमरान ने बताया कि अस्पताल परिसर में 200 से 250 स्थानों पर अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। साथ ही आपातकालीन निकासी के लिए दो विशेष इमरजेंसी गेट सहित कुल पांच निकास द्वार बनाए गए हैं।इसके उलट जिले के कई सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से फायर ऑडिट नहीं हुआ है। रहुई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले एक वर्ष से अग्निशमन उपकरणों की जांच नहीं हुई है, जबकि हरनौत रेफरल अस्पताल में अप्रैल 2025 के बाद से अग्नि सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया।निजी अस्पतालों की स्थिति और भी चिंताजनक है। आधिकारिक रिकॉर्ड में जिले में 156 निजी अस्पताल निबंधित हैं, जबकि वास्तविक संख्या 500 से अधिक बताई जा रही है।

इनमें बड़ी संख्या ऐसे अस्पतालों की है जो बिना निबंधन और बिना अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के संचालित हो रहे हैं।मई 2026 तक बिहारशरीफ अनुमंडल के सात प्रखंडों में केवल 45 निजी अस्पतालों ने फायर ऑडिट कराकर एनओसी प्राप्त किया है। रामचंद्रपुर, खंदकपर और सोहसराय जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में संकरी गलियों के बीच संचालित अस्पतालों में शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते व्यापक जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है।














