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खेती का भविष्य बदलने की तैयारी: एआई, जलवायु-स्मार्ट कृषि और नई तकनीकों पर मंथन, सबौर में जुटे देशभर के वैज्ञानिक

बक्सर, 19 जून (विक्रांत) बदलते जलवायु परिदृश्य, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और किसानों की आय बढ़ाने की चुनौती के बीच बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में आयोजित 31वीं अनुसंधान परिषद बैठक (आरसीएम-खरीफ 2026) कृषि के भविष्य की दिशा तय करने का बड़ा मंच बन गई। देशभर के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने कृषि अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए व्यापक मंथन किया।

माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 300 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने विश्वविद्यालय की अनुसंधान उपलब्धियों, विकसित किस्मों, पेटेंट, कॉपीराइट, स्टार्टअप गतिविधियों और आगामी शोध योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान “कृषि विकास की नई उड़ान – बीएयू सबौर के साथ” लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया तथा कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन हुआ।

आईसीएआर, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. नवीन प्रकाश सिंह ने कहा कि किसी भी अनुसंधान की सफलता तभी मानी जाएगी जब उसका सीधा लाभ किसानों की आय, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण विकास में दिखाई दे। उन्होंने रिमोट सेंसिंग, फसल विविधीकरण, युवा शोध नेतृत्व और तकनीक आधारित कृषि अनुसंधान को भविष्य की आवश्यकता बताया। गन्ना अनुसंधान संस्थान, पूसा के निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह ने कृषि यंत्रीकरण को समय की मांग बताते हुए छोटे और सीमांत किसानों के लिए किफायती कृषि उपकरण विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से फसल प्रजनन और नई किस्मों के विकास को गति देने की आवश्यकता बताई, साथ ही हरित खाद फसलों के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर बल दिया।

पद्मश्री डॉ. बी. एस. धिल्लों ने बिहार की कृषि संभावनाओं की सराहना करते हुए अनुसंधान को किसानों की समृद्धि और खाद्य सुरक्षा से जोड़ने का आह्वान किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान का अंतिम लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा देना है। तकनीकी सत्रों में जलवायु-सहिष्णु किस्मों, एआई आधारित अनुसंधान, मूल्य संवर्धन, स्टार्टअप, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। बैठक के दूसरे दिन खरीफ-2026 की अनुसंधान रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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