मुजफ्फरपुर, 25 जून (संतोष गुप्ता) बिहार में पुल निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुजफ्फरपुर के बहुप्रतीक्षित चंदवारा पुल में उद्घाटन से पहले ही बड़े पैमाने पर तकनीकी खामियां सामने आने से निर्माण एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। पुल के कई पिलरों से कंक्रीट टूटकर नीचे गिर रहा है, जिससे अंदर लगे लोहे के सरिए साफ दिखाई देने लगे हैं। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सूत्रों के अनुसार, पुल निर्माण में लगी एजेंसी द्वारा इन खामियों को छिपाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन मामला तब उजागर हुआ जब आरटीआई कार्यकर्ता देवव्रत कुमार सहनी ने इसकी लिखित शिकायत सरकार से की।

शिकायत मिलते ही सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दिए। बुधवार को पथ निर्माण विभाग, पटना के अधीक्षण अभियंता रानेन्द्र कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम चंदवारा पुल पहुंची। टीम में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के वरिष्ठ अधिकारी, कार्यपालक अभियंता, एसडीओ तथा जूनियर इंजीनियर शामिल थे। अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त पिलरों, एक्सपेंशन जॉइंट्स और डेक स्लैब का गहन निरीक्षण किया तथा निर्माण की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की।निरीक्षण के बाद अधीक्षण अभियंता रानेन्द्र कुमार ने बताया कि जांच टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीधे सरकार को सौंपेगी।

रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अभियंताओं, अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता देवव्रत कुमार सहनी का दावा है कि प्रारंभिक जांच में ही निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। वहीं जांच टीम ने मौके पर ही निर्माण एजेंसी को निर्देश दिया है कि दो माह के भीतर सभी तकनीकी खामियों और दरारों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए।मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुल की मजबूती और गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच आईआईटी पटना के विशेषज्ञों से कराने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक आईआईटी पटना की अंतिम सुरक्षा रिपोर्ट और क्लियरेंस प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक पुल पर भारी वाहनों के परिचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।













