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इतिहास के गर्भ से निकला अनमोल खजाना: तिलाधक विश्वविद्यालय में मिले दुर्लभ अवशेष, डीएम ने संरक्षण के दिए सख्त निर्देश

नालंदा, 04 जुलाई (अविनाश पांडेय) नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड स्थित ग्राम पंचायत राज तेलहाड़ा का प्राचीन तिलाधक विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार को जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने उत्खनन स्थल का निरीक्षण कर यहां मिले ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अवशेषों का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन बेशकीमती धरोहरों के वैज्ञानिक संरक्षण, सुरक्षित रखरखाव तथा उनकी ऐतिहासिक महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए विस्तृत डॉक्यूमेंट्री तैयार कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर तेलहाड़ा टीले में उत्खनन कार्य शुरू कराया गया था।

खुदाई के दौरान पालकालीन, गुप्तकालीन और कुषाणकालीन सभ्यताओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए। इनमें सैकड़ों मॉनास्ट्री सील, अभिलेख, भगवान बुद्ध, अवलोकितेश्वर, चामुंडा, हरितिका, मां तारा, अपराजिता की प्रतिमाएं, टेराकोटा मूर्तियां तथा प्राचीन बर्तन शामिल हैं, जिन्हें भारतीय इतिहास और बौद्ध संस्कृति की अमूल्य धरोहर माना जा रहा है। इतिहासकारों के अनुसार तिलाधक विश्वविद्यालय का इतिहास पहली सदी से जुड़ा हुआ है। प्रसिद्ध चीनी यात्री हेनसांग ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में तिलाधक महाविहार और यहां की समृद्ध शिक्षा व्यवस्था का विस्तार से उल्लेख किया है।

बताया जाता है कि इस विश्वविद्यालय में महायान बौद्ध परंपरा के साथ शब्द विद्या, शिल्प विद्या, तर्कशास्त्र, चिकित्सा, सांख्यिकी, बौद्ध साहित्य और दर्शन जैसे विषयों की उच्च शिक्षा दी जाती थी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी पुरावशेषों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संग्रहालय में आवश्यक कंपार्टमेंट विकसित कर अवशेषों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित करने तथा तेलहाड़ा की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उच्च गुणवत्ता की डॉक्यूमेंट्री तैयार कराने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर प्रभारी उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी सहित प्रशासन और संबंधित विभागों के कई अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी के निरीक्षण से ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और पर्यटन विकास की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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