नालंदा, 22 जून (अविनाश कुमार) शिक्षा से वंचित बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में स्कूल से बाहर रह रहे 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 24 हजार 471 बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत नालंदा जिले के 311 और शेखपुरा जिले के 640 बच्चों को चिन्हित किया गया है।शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने बताया कि इन बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप शैक्षणिक दक्षता प्रदान करने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में पढ़ाया जाएगा। छह से नौ माह तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के बाद बच्चों का नजदीकी विद्यालयों में नामांकन कराया जाएगा।

सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 10 जुलाई तक केंद्रों का संचालन शुरू करने का निर्देश दिया गया है। नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने बताया कि स्कूल से बाहर बच्चों का सत्यापन कर आंकड़ों को प्रबंध पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। 30 जून तक विशेष केंद्रों की मैपिंग पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद प्रत्येक केंद्र के लिए एक नोडल शिक्षक का चयन होगा। चयनित शिक्षकों को 1 जुलाई से 6 जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बच्चों को कम समय में आवश्यक शैक्षणिक स्तर तक पहुंचा सकें। विशेष केंद्रों में केंद्र का नाम, शिक्षक का विवरण, संचालन अवधि और बच्चों की सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। केंद्र शुरू होने से पहले बच्चों का बेसलाइन सर्वे और सात दिनों के भीतर शैक्षणिक प्रोफाइल तैयार की जाएगी।

राज्य के आंकड़ों पर नजर डालें तो समस्तीपुर में सबसे अधिक 1,560 बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए हैं, जबकि मुजफ्फरपुर में यह संख्या मात्र 68 है। राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे बच्चों की संख्या 11 लाख 70 हजार 182 दर्ज की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है।सरकार को उम्मीद है कि इस विशेष अभियान से हजारों बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिलेगा और उनका भविष्य नई दिशा की ओर बढ़ेगा।














