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अंचल कार्यालय के चक्कर से मिलेगी ग्रामीणों को राहत, अब पंचायत भवन में ही होंगे राजस्व के काम

पटना, 23 अगस्त (पटना डेस्क) राजस्व संबंधी कार्यों के लिए ग्रामीणों को अब बार-बार अंचल कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। सिवान जिले के दारौंदा अंचल प्रशासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए नई पहल करते हुए नवपदस्थापित राजस्व कर्मचारियों के पंचायतवार कार्य दिवस निर्धारित कर दिए हैं। इसके तहत संबंधित कर्मचारी सप्ताह के तय दिनों में अपने-अपने आवंटित हल्का की पंचायतों में स्थित पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे और राजस्व मामलों का निपटारा करेंगे। प्रशासन के इस फैसले से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। सीओ वेद प्रकाश नारायण की ओर से जारी आदेश के अनुसार राजस्व कर्मचारी अमरेंद्र कुमार सिंह को सिरसांव, बाल बंगरा एवं करसौत पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं संजय कुमार को पांडेयपुर, रामगढ़ा एवं मड़सरा पंचायत का राजस्व कार्य सौंपा गया है। राजेंद्र प्रसाद शेरही, हड़सर, रसुलपुर एवं पकवलिया पंचायतों में राजस्व संबंधी कार्यों का निष्पादन करेंगे।इसी क्रम में सूरज पाल चौरसिया को कोड़ारी कलां, रुकुंदीपुर, कोथुआ-सारंगपुर एवं रामसापुर पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि संतोष कुमार जलालपुर, बगौरा एवं पिनर्थु खुर्द पंचायत में ग्रामीणों के राजस्व संबंधी मामलों को देखेंगे। कर्मचारियों को आवंटित पंचायतों में निर्धारित कार्य दिवस पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राजस्व कर्मचारी सप्ताह के अलग-अलग दिनों में संबंधित पंचायत भवनों में बैठेंगे।

इस दौरान ग्रामीण दाखिल-खारिज, भूमि संबंधी आवेदन और अन्य राजस्व मामलों को लेकर सीधे कर्मचारियों से संपर्क कर सकेंगे। वहीं शनिवार को सभी राजस्व कर्मचारी अंचल कार्यालय में उपस्थित रहकर ग्रामीणों के मामलों की सुनवाई करेंगे तथा लंबित कार्यों का निष्पादन करेंगे।अंचल प्रशासन की इस व्यवस्था से पंचायत स्तर पर राजस्व कर्मचारियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे छोटे-छोटे कार्यों के लिए ग्रामीणों को अंचल कार्यालय तक आने-जाने में लगने वाले समय और खर्च की बचत होगी। साथ ही दाखिल-खारिज समेत भूमि से जुड़े मामलों के निष्पादन में तेजी आने की संभावना है। प्रशासन का मानना है कि पंचायत भवनों में कर्मचारियों की मौजूदगी से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे रखने का अवसर मिलेगा। इससे राजस्व कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर अधिक आसानी से मिल सकेगा।

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