पटना, 07 जुलाई (पटना डेस्क) खगड़िया मंडल कारा में महज 24 घंटे के भीतर दो बंदियों की मौत से हड़कंप मच गया है। लगातार हुई इन मौतों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों के परिजनों ने जेल के भीतर मारपीट और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि कारा प्रशासन दोनों बंदियों की मौत बीमारी के कारण होने की बात कह रहा है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और न्यायिक जांच की मांग तेज हो गई है।रविवार की देर रात परबत्ता प्रखंड के मड़ैया निवासी महादलित बंदी चंदन मलिक की सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। जेल अधीक्षक राधे श्याम सुमन ने बताया कि वर्ष 2007 के चोरी के एक मामले में जमानत रद्द होने के बाद 29 जून को उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह पहले शराब और गांजा का सेवन करता था, जिससे उसके लीवर और पेट में गंभीर बीमारी थी। हालत बिगड़ने पर उसे सदर अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। दूसरी ओर, मृतक की पत्नी काजल देवी ने आरोप लगाया कि जेल में उनके पति के साथ मारपीट की जाती थी। सोमवार को परिजन और समाज के लोग सदर अस्पताल पहुंचकर जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा करने लगे। पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति नियंत्रित हुई। बहिष्कृत हितकारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव डोम ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सामने आएगी।

गौरतलब है कि रविवार शाम ही मानसी थाना क्षेत्र के सिंगरसामा गांव निवासी बंदी गोनू चौधरी की भी मौत हो गई थी। जेल प्रशासन का दावा है कि वह अचानक गिर पड़ा था, जबकि उसके परिजनों ने भी मारपीट और लापरवाही का आरोप लगाया है। लगातार दो मौतों के बाद खगड़िया मंडल कारा की व्यवस्था अब गंभीर सवालों के घेरे में है।













