पटना, 05 जुलाई (पटना डेस्क) कटिहार नगर निगम क्षेत्र की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के बीच निगम के 30 वार्डों की सफाई पर हर महीने करीब 80 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। कई इलाकों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर, जाम नालियां और फैली गंदगी से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।नगर निगम के 45 वार्डों में से वार्ड संख्या 1 से 9, 16 से 26 तथा 34 से 45 तक की सफाई व्यवस्था निजी एजेंसी के जिम्मे है।

निरीक्षण के दौरान कटिहार-मनिहारी मुख्य मार्ग पर बुलेट शोरूम के समीप, सहकारिता कार्यालय, बुद्धू चौक, होटल प्रेम पैराडाइज के पास अस्थायी बस पड़ाव, वार्ड 41, रामपाड़ा मोहल्ला और रेलवे कॉलोनी सहित कई स्थानों पर घंटों तक कचरा पड़ा मिला। दोपहर के बाद भी कई जगहों से कचरे का उठाव नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी एजेंसी नियमित कचरा संग्रहण और नालियों की सफाई में लापरवाही बरत रही है। सड़कों के किनारे घास-फूस उग आए हैं, जबकि मानसून में जाम नालियां जलजमाव और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा रही हैं।

कीटनाशकों का छिड़काव नहीं होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। नागरिकों ने कहा कि नियमित कर चुकाने के बावजूद उन्हें बुनियादी सफाई सुविधा नहीं मिल रही। गंदगी और बदबू से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। दूसरी ओर निगम के सीधे नियंत्रण वाले वार्ड 12, 13 और 14 सहित 15 वार्डों में नियमित सफाई और समय पर कचरा उठाव की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निजी एजेंसी को हर महीने लाखों रुपये का भुगतान हो रहा है, तब भी संबंधित वार्डों की सफाई व्यवस्था बदहाल क्यों बनी हुई है।













