बक्सर, 28 जून (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का रविवार को भव्य समापन हुआ। देश के आठ राज्यों से आम की 1,100 से अधिक किस्मों की 2,000 से ज्यादा प्रविष्टियों ने इस आयोजन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। कार्यक्रम में किसानों ने आम उत्पादन, संरक्षण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक बागवानी तकनीकों पर विशेषज्ञों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन तथा बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा को प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना था, लेकिन भागलपुर हवाई अड्डे पर कम दृश्यता के कारण उनका विमान उतर नहीं सका और वापस पटना लौट गया। इसके बावजूद दोनों अतिथियों ने लोक भवन, पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया और आम विविधता प्रदर्शनी का वर्चुअल अवलोकन किया।
राज्यपाल ने कहा कि वे इस आयोजन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए उत्साहित थे, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर का आम महोत्सव देश में विरले ही देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आम प्रकृति की अनमोल देन है और बिहार की धरती ऐतिहासिक रूप से उत्कृष्ट आम उत्पादन के लिए जानी जाती रही है।

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ का निवासी होने के कारण उन्हें पहले वहां का आम सर्वश्रेष्ठ लगता था, लेकिन बिहार आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि बिहार का आम स्वाद, विविधता और गुणवत्ता के मामले में देश में सबसे अलग पहचान रखता है। उन्होंने अगले वर्ष मौसम को ध्यान में रखते हुए आयोजन की तिथि पहले निर्धारित करने का सुझाव दिया और स्वयं शामिल होने का आश्वासन भी दिया। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रत्येक आम के पीछे किसानों की मेहनत और प्रकृति का आशीर्वाद छिपा होता है।

उन्होंने भागलपुर के जर्दालू आम की अंतरराष्ट्रीय पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय को कृषि नवाचार और अनुसंधान के हर प्रयास में सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि यह आयोजन आम के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का अभूतपूर्व प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार देश का नंबर-1 आम उत्पादक राज्य बनेगा।

समारोह में प्रगतिशील आम उत्पादकों, महिला उद्यमियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय आम प्रदर्शनी में 57 समूहों के अंतर्गत उत्कृष्ट किस्मों और आम आधारित उत्पादों का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण “आम खाओ प्रतियोगिता” रही, जिसमें किसान, छात्र, छात्राएं और बाल वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन का उद्देश्य उत्कृष्ट आम किस्मों का संरक्षण, किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना तथा आम आधारित उद्यमिता और प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है। समापन समारोह में सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया।














