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बिना पैसे नहीं होता काम की गूंज से हिला समाहरणालय: जनता दरबार में भ्रष्टाचार के आरोपों पर डीएम सख्त, कई मामलों की जांच के आदेश

नालंदा, 27 जून (अविनाश पांडेय) नालंदा समाहरणालय में शनिवार को आयोजित दैनिक जनता दरबार उस समय बेहद गंभीर हो गया, जब जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे फरियादियों ने प्रशासनिक लापरवाही, कथित भ्रष्टाचार, भूमि विवाद और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों का अंबार लगा दिया। जिलाधिकारी उदिता सिंह ने एक-एक फरियादी की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित जांच कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। जनता दरबार में कुल 33 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें भूमि विवाद, राजस्व, सड़क निर्माण, अतिक्रमण, दाखिल-खारिज, शिक्षा और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े मामले प्रमुख रहे। जनता दरबार में सबसे गंभीर शिकायत एक विद्यालय कर्मी की ओर से सामने आई।

आवेदक ने आरोप लगाया कि विद्यालय में अवैध वसूली का विरोध करने पर उसे बिना कारण बताए निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, शुद्धि पत्र जारी होने के बावजूद अब तक उसकी बहाली नहीं की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता तथा जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को विस्तृत जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान जोरारपुर गांव के एक आवेदक ने आरोप लगाया कि राजस्व कर्मचारी बिना पैसे लिए कोई कार्य नहीं करते। इस शिकायत को जिलाधिकारी ने अत्यंत गंभीर मानते हुए जिला निगरानी समिति से जांच कराने का आदेश दिया। वहीं इस्लामपुर प्रखंड से पहुंचे एक अन्य फरियादी ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय में रिश्वत दिए बिना मालगुजारी रसीद तक नहीं काटी जाती।

इस मामले में भी संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए। जनता दरबार में रैयती भूमि पर निर्धारित हिस्से से अधिक कब्जा, इस्लामपुर बाईपास सड़क निर्माण योजना के तहत धामौली मौजा में कथित गलत मापी, हिस्से की जमीन पर जबरन मकान निर्माण रोकने, दाखिल-खारिज पर रोक लगाने और विभिन्न भूमि विवादों से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं। इन मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए अपर समाहर्ता एवं जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। अस्थावां प्रखंड के मलावा गांव के एक आवेदक ने गांव के विद्यालय भवन में हाई स्कूल स्तर की पढ़ाई शुरू कराने की मांग उठाई, जिस पर जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके अलावा गैरमजरूआ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने सहित अन्य राजस्व मामलों में भी संबंधित विभागों को शीघ्र जांच और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया। जिलाधिकारी उदिता सिंह ने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण किया जाए, ताकि आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो सके।

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