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प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रही अफ्रीकन मांगुर: बाजारों में खुलेआम कारोबार से मचा हड़कंप, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरे की आशंका

पटना, 26 जून (पटना डेस्क) सुपौल जिला के छातापुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न हाट-बाजारों में सरकार द्वारा प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर (थाई कैटफिश) मछली की खुलेआम बिक्री होने की सूचना से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। मुख्यालय बाजार सहित जीवछपुर, महद्दीपुर, भागवतपुर, सोहठा और मकुरजा बाजार में पिछले कई दिनों से इस प्रतिबंधित प्रजाति की मछली बेचे जाने की बात सामने आ रही है। लोगों का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद यह कारोबार बिना किसी रोक-टोक के जारी है, जबकि संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बाजारों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में अफ्रीकन मांगुर की बिक्री हो रही है। कई दुकानदार खुलेआम इस मछली का कारोबार कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके गंभीर और दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।मत्स्य विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीकन मांगुर एक आक्रामक विदेशी प्रजाति मानी जाती है, जो स्थानीय जलाशयों में मौजूद देशी मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यह जैव विविधता को प्रभावित करने के साथ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन पर भी प्रतिकूल असर डालती है। इसी वजह से केंद्र एवं राज्य सरकारों ने इसके पालन, परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी संभावित जोखिमों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद इसकी बिक्री आम उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रही है।

नागरिकों ने जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग से तत्काल संयुक्त छापेमारी अभियान चलाने, बाजारों में नियमित जांच करने, प्रतिबंधित मछलियों की पहचान कर जब्ती की कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की सक्रियता और नियमित निगरानी से ही इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है तथा पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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