पटना, 26 जून (अविनाश कुमार) बिहार के शहरी विकास की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) मिशन में अपनी भागीदारी को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राज्य के शहरों में आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खुल गया है। सरकार का दावा है कि यह योजना आने वाले वर्षों में बिहार के शहरी परिदृश्य को नई पहचान देगी। विभागीय जानकारी के अनुसार, अब राज्य के पात्र नगर निकाय सीधे केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर सकेंगे। इसके बाद वे मिशन के तहत विभिन्न विकास परियोजनाओं को लागू करने के लिए पात्र होंगे। सरकार का मानना है कि इससे शहरों में टिकाऊ विकास के साथ-साथ स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं को भी गति मिलेगी।

केंद्र सरकार ने देशभर के शहरों के विकास के लिए अर्बन चैलेंज फंड के तहत एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें बिहार के लिए 2,900 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। हालांकि, किसी भी परियोजना की कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। शेष 50 प्रतिशत राशि संबंधित नगर निकायों को स्वयं जुटानी होगी। इसके लिए उन्हें ऋण, बॉन्ड या अन्य वित्तीय संसाधनों का उपयोग करने की अनुमति होगी।नगर निकायों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) को साझेदार बनाया गया है।

चयनित परियोजनाओं के लिए हुडको के माध्यम से आसान ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे स्थानीय निकायों को वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।इस मिशन के तहत प्राथमिकता उन परियोजनाओं को दी जाएगी, जो नगर निकायों के लिए दीर्घकालिक राजस्व का मजबूत स्रोत बन सकें। सरकार का मानना है कि इससे नगर निकाय आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे, योजनाबद्ध शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा और बिहार के शहर आधुनिक, स्वच्छ, सुव्यवस्थित तथा निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनकर विकास की नई इबारत लिखेंगे।













