बक्सर, 12 जून (विक्रांत) । अनुमंडल अस्पताल के एमएनसीयू में बिजली संकट को लेकर दर्ज प्राथमिकी मामले में शुक्रवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक अफरोज आलम को बक्सर सीजेएम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई। अदालत के इस फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल कर्मियों के बीच पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा। गौरतलब है कि एमएनसीयू में बिजली व्यवस्था बाधित होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन के निर्देश पर अस्पताल की कार्यकारी उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी ने डुमरांव थाना में स्वास्थ्य प्रबंधक अफरोज आलम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

10 जून को दर्ज प्राथमिकी संख्या 148/26 में उन पर अस्पताल में उत्पन्न बिजली संकट की जानकारी होने के बावजूद व्यवस्था दुरुस्त कराने में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया गया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अफरोज आलम ने अपने वरीय अधिवक्ता शिव प्रकाश राय के माध्यम से बक्सर जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई दस्तावेजी साक्ष्य और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) ने स्वास्थ्य प्रबंधक को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि एक गैर-चिकित्सकीय कर्मचारी को अकेले इस मामले में आरोपी बनाया जाना आश्चर्यजनक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले का संबंध अस्पताल की समग्र प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था से है, तब किसी चिकित्सक या संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। वहीं, अदालत से राहत मिलने के बाद अफरोज आलम ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और आगे भी न्याय मिलेगा। उन्होंने अपने निलंबन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना कारण-पृच्छा जारी किए निलंबन की कार्रवाई करना विभागीय नियमों के अनुरूप नहीं है। उधर, इस मामले में अदालत के फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग में नई बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजर विभागीय जांच और मामले की आगामी कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।














