नालंदा, 10 जून (अविनाश पांडेय) बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते चलन को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब आम नागरिक भी अपने निजी भवन, आवासीय परिसर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकेंगे। इतना ही नहीं, इसके लिए सरकार की ओर से लाखों रुपये की प्रोत्साहन राशि और अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। नई व्यवस्था को लेकर परिवहन विभाग ने सभी जिला परिवहन कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बिहार इलेक्ट्रिक वाहन परिचालन नीति के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में कुल वाहनों की संख्या में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसी उद्देश्य से राज्यभर में चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार से लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ेगा और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) रंजीत कुमार ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। नई गाइडलाइन के अनुसार चार्जिंग स्टेशन की विभिन्न श्रेणियों पर 75 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पेट्रोल पंप, होटल, मोटल, हाउसिंग सोसाइटी, बस टर्मिनल, सार्वजनिक पार्किंग स्थल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं।

आवश्यक उपकरणों की खरीद पर अधिकतम 2.25 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा, जबकि बड़े व्यावसायिक चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को 10 से 15 लाख रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी।नई नीति के तहत आवासीय भवनों के मालिक, आवासीय कल्याण संघ (आरडब्ल्यूए) और सहकारी गृह निर्माण समितियां भी अपने परिसर में चार्जिंग पॉइंट स्थापित कर सकेंगी। इसके लिए कम से कम पांच कारों की पार्किंग क्षमता होना अनिवार्य होगा। सक्षम विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करने के बाद स्थापना की अनुमति मिलेगी।डीटीओ ने बताया कि इच्छुक आवेदकों को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सत्यापन के बाद प्रोत्साहन राशि जारी की जाएगी। सरकार की इस पहल से राज्य में हरित परिवहन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।














