पटना, 07 जून (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में सरकारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने अपने आधिकारिक आवासों पर तैनात सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस लौटा दिया है। इसके तुरंत बाद राबड़ी आवास के बाहर लाठियां और बांस के डंडे लिए सैकड़ों आरजेडी कार्यकर्ता जमा हो गए और सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभालने का ऐलान कर दिया। सुरक्षाकर्मियों के हटते ही महिला कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में समर्थक आवास के मुख्य द्वार पर मुस्तैद दिखाई दिए। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि वे अपने नेताओं की सुरक्षा के लिए हर समय तैयार हैं।

कई कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार पर राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि आरजेडी नेतृत्व को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।राबड़ी आवास के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिला। एक कार्यकर्ता ने कहा कि लालू प्रसाद फिलहाल पटना में नहीं हैं और तेजस्वी यादव भी बाहर हैं, ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता अपने नेताओं को असुरक्षित नहीं छोड़ सकते। वहीं महिला कार्यकर्ताओं ने भी सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे किसी भी तरह का अपमान सहन नहीं करेंगी।

पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि संशोधित सुरक्षा व्यवस्था को अस्वीकार करना स्वाभिमान और राजनीतिक सम्मान की रक्षा का निर्णय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सुरक्षा और आवास जैसे विषयों का इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है।आरजेडी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि पार्टी नेतृत्व की सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक हुई तो जनता इसका जवाब सड़कों पर देगी। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा में कटौती और सरकारी आवास को लेकर उठाए गए कदम सुनियोजित राजनीतिक दबाव का हिस्सा हैं।उधर, सत्तारूढ़ जदयू ने आरजेडी के इस कदम को राजनीतिक नाटक बताया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि यदि लालू परिवार वास्तव में स्वाभिमान की बात करता है तो उसे केवल सुरक्षाकर्मी ही नहीं, बल्कि सरकारी बंगला, बुलेटप्रूफ वाहन और अन्य विशेष सुविधाएं भी छोड़ देनी चाहिए। गौरतलब है कि राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया गया था। इसी के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति में बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।













