सीतामढ़ी, 03 मई (मोहम्मद कलीम) जिले के सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ताजा मामला डुमरा प्रखंड के चक्का रसलपुर गांव से सामने आया है, जहां एक युवक की मौत के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए ठेले का सहारा लेना पड़ा। इस दर्दनाक दृश्य ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और अव्यवस्था को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी अमर कुमार को अचानक बिजली का करंट लग गया था। गंभीर हालत में परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।अस्पताल में न तो स्ट्रेचर की व्यवस्था मिली और न ही शव वाहन उपलब्ध कराया गया।

परिजन मदद के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। आखिरकार मजबूरी में उन्हें एक ठेले का इंतजाम करना पड़ा और उसी पर शव को रखकर घर ले जाना पड़ा। इस दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे, लेकिन किसी ने आगे बढ़कर सहायता नहीं की। मृतक के परिजन उपदेश राय ने बताया कि अस्पताल में उन्हें किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं मिली। “हम लोग बेहद परेशान रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था,” उन्होंने कहा। परिजनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि सरकार हर महीने करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की कमी को भी उजागर किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी कई बार ऐसी लापरवाही सामने आ चुकी है। बावजूद इसके सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घटना के बाद प्रशासन जागेगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल, ठेले पर ले जाए गए शव की तस्वीरें सिस्टम की नाकामी की गवाही दे रही हैं।













