बक्सर, 02 मई (विक्रांत) अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत करने की दिशा में बक्सर जिला अब एक नई पहचान गढ़ता नजर आ रहा है। ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत चल रहे विशेष अभियान में एक सनसनीखेज और ऐतिहासिक खोज सामने आई है। जिले के एक गुरुद्वारा से 100 वर्ष से अधिक पुरानी गुरुग्रंथ साहिब की दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि प्राप्त हुई है, जिसने स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के बीच उत्साह की लहर दौड़ा दी है। इतना ही नहीं, जिला प्रशासन के सहयोग से एक और प्राचीन ग्रंथ भी खोजा गया है, जो वर्षों से गुमनामी में था।

इन महत्वपूर्ण खोजों ने बक्सर को एक बार फिर ऐतिहासिक और बौद्धिक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित किया है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रतिमा कुमारी ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ का उद्देश्य सिर्फ पांडुलिपियों को खोजना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का स्रोत बनाना है। उन्होंने कहा कि “बक्सर की धरती पर छिपी ऐसी अनमोल धरोहरों को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।” प्रशासन अब इन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, ताकि समय और मौसम के प्रभाव से इन्हें बचाया जा सके।

विशेषज्ञों की टीम इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और ऐतिहासिक महत्व का भी अध्ययन कर रही है। इस पहल के तहत जिला प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन ग्रंथ, हस्तलिखित दस्तावेज या ऐतिहासिक सामग्री है, तो उसे ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के साथ साझा करें। इससे न सिर्फ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि बक्सर की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी। ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के जरिए बक्सर अब अपनी खोई हुई बौद्धिक धरोहर को फिर से संजोने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह अभियान न केवल अतीत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी मजबूत माध्यम बनता जा रहा है।














