बक्सर, 10 अक्टूबर (विक्रांत) पान की खेती को अधिक उत्पादनकारी, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी बनाने की दिशा में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने की पहल तेज कर दी है। इसी कड़ी में पान अनुसंधान केंद्र, इस्लामपुर द्वारा कृषि अनुसंधान संस्थान (एआरआई), पटना में 8 से 10 अक्टूबर तक तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आत्मा, सारण के वित्तीय सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में सारण जिले के 25 किसानों ने भाग लेकर पान की उन्नत खेती के गुर सीखे।

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह तथा कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस.एन. दास ने किया। वैज्ञानिकों ने किसानों से पान उत्पादन में परंपरागत तरीकों के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों के इस्तेमाल से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार के साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पान की वैज्ञानिक खेती, उन्नत उत्पादन तकनीक, फसल प्रबंधन, संतुलित पोषण, रोग एवं कीट प्रबंधन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।

किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि पान के खेतों का भ्रमण कराकर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने खेत में अपनाई जाने वाली तकनीकों, फसल की देखभाल और बेहतर उत्पादन के उपायों को विस्तार से समझाया।कार्यक्रम के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. एन. आजमी एवं डॉ. प्रभात कुमार ने प्रशिक्षण के संचालन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रंजीत कुमार सहित संस्थान के सभी वैज्ञानिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उन्नत खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की। गौरतलब है कि बिहार के पान को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से इसकी विशिष्ट पहचान और मजबूत हुई है।

जीआई पहचान से क्षेत्रीय विशेषता और गुणवत्ता को बाजार में अलग पहचान मिलने की संभावना बढ़ी है। ऐसे में वैज्ञानिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और जीआई टैग के प्रति जागरूकता किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।समापन अवसर पर किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाकर पान की खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों तक नवीनतम कृषि तकनीक पहुंचाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है।


















