समस्तीपुर, 29 सितम्बर (हर्षिता “अश्क”) भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली कर्पूरी ग्राम स्थित जी.के.पी.डी. महाविद्यालय में “जीवन में लोक कला का महत्व” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय शासी निकाय के सचिव डॉ. अनीसुर रहमान ने दीप प्रज्वलित कर किया। शासी निकाय की अध्यक्ष नमिता कुमारी ने अतिथियों का स्वागत किया। संगोष्ठी में लोक कला के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व पर मंथन हुआ। मुख्य अतिथि एलएनएमयू, दरभंगा के संगीत एवं नाट्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. लावण्या कृति सिंह ‘काव्या’ ने कहा कि लोक कला समाज की संस्कृति और परंपरा की पहचान है।

लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं में आम जनजीवन की भावनाएं, संस्कार और सामाजिक सरोकार जीवंत होते हैं। उन्होंने आधुनिकता के दौर में लोक कलाओं के संरक्षण के लिए युवाओं को इससे जोड़ने की जरूरत बताई।विशिष्ट अतिथि डॉ. आर.एन. चौरसिया, कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस, एलएनएमयू ने कहा कि लोक कला मनोरंजन के साथ सामाजिक जागरूकता और एकता का प्रभावी माध्यम है। प्रो. पुष्पम नारायण, प्रधानाचार्या, एमआरएम कॉलेज, दरभंगा ने लोक कला को शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया। डॉ. अनुपम प्रिया ने कहा कि लोक कला के जरिए सामाजिक संदेश सहजता से जन-जन तक पहुंचाए जा सकते हैं।

उमाशंकर पासवान, सागर सिंह, डॉ. लक्ष्मण यादव और लक्ष्मण कुमार ने भी लोक कला के संरक्षण एवं संवर्धन पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण कई पारंपरिक लोक कलाएं सीमित होती जा रही हैं। स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन, युवाओं को प्रशिक्षण तथा शैक्षणिक संस्थानों में लोक कला आधारित गतिविधियां समय की मांग हैं।इस दौरान युवा कला आश्रम की टीम ने विभिन्न लोक कलाओं पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। सुश्री कोमल ने सहयोगियों के साथ कला प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. राम प्रवेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संगोष्ठी में लोक कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया गया। धन्यवाद ज्ञापन संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमारी ने किया।














