बक्सर, 23 सितम्बर (विक्रांत) अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय परिसर में बुधवार को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम और महिलाओं के कानूनी अधिकारों को लेकर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों, शिकायत की प्रक्रिया और उपलब्ध कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष काजल झाब तथा अवर न्यायाधीश सह सचिव नेहा दयाल के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में व्यवहार न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारी सब जज-प्रथम किरण ओझा, सब जज-तृतीय विनीत कुमार तथा सब जज-चतुर्थ सह मुंसिफ प्रतीक मिश्रा मौजूद रहे।

कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव एवं पीएलवी अनिशा भारती ने न्यायिक पदाधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और आम लोगों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। पैनल अधिवक्ता ने कहा कि कार्यस्थल प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण होना चाहिए। महिलाओं के साथ होने वाली अशोभनीय टिप्पणी, अवांछित व्यवहार, अनुचित स्पर्श अथवा अन्य आपत्तिजनक आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

ऐसी परिस्थितियों में पीड़िता को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी रखते हुए उचित मंच पर शिकायत करनी चाहिए।उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के विभिन्न स्वरूपों, शिकायत की प्रक्रिया तथा उपलब्ध कानूनी संरक्षण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना केवल किसी एक संस्थान की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और कार्यस्थल से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। कानून की जानकारी और जागरूकता के माध्यम से सम्मान एवं सुरक्षा का वातावरण तैयार किया जा सकता है।

मौके पर अधिवक्ता मुरली मनोहर सिंह, सदन पाण्डे, धनिक सिंह, सुनील तिवारी, अरविंद ठाकुर एवं किरण सिंह सहित व्यवहार न्यायालय के कर्मी मुकेश कुमार, रवि कुमार, आदित्य कुमार, अभिषेक कुमार, चंदन कुमार, अरुण कुमार, भोला प्रसाद और राजू बख्सी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल की सराहना की।













